UPI New Rules January 2026: भारत के डिजिटल भुगतान क्षेत्र में एक बड़ा और महत्वपूर्ण परिवर्तन आने वाला है जो यूपीआई यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस के उपयोगकर्ताओं को सीधे प्रभावित करेगा। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने जनवरी 2026 में यूपीआई के संचालन से संबंधित कई नए और महत्वपूर्ण नियमों को लागू किया है। ये नियम गूगल पे, फोनपे, पेटीएम और अन्य सभी यूपीआई-आधारित एप्लिकेशनों के उपयोगकर्ताओं को प्रभावित करेंगे। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य यूपीआई सिस्टम को अधिक सुरक्षित, तेज़ और कुशल बनाना है ताकि डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया समस्याओं से मुक्त हो सके। हर यूपीआई उपयोगकर्ता, व्यापारी और डिजिटल भुगतान करने वाले नागरिकों को इन नए नियमों की विस्तृत जानकारी प्राप्त करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
बैलेंस चेक की सीमा में कमी
यूपीआई के नए नियमों के तहत एक महत्वपूर्ण परिवर्तन यह किया गया है कि अब उपयोगकर्ता एक दिन में अधिकतम पचास बार ही अपने बैंक खाते का बैलेंस चेक कर सकते हैं। यह सीमा प्रत्येक एप्लिकेशन पर अलग-अलग लागू होगी जिसका अर्थ है कि यदि किसी के पास दोनों गूगल पे और फोनपे हैं तो वह दोनों ऐप्स से मिलाकर एक सौ बार बैलेंस चेक कर सकता है। यह नीति उन लोगों के लिए कुछ असुविधाजनक हो सकती है जिन्हें अपने खाते का बैलेंस बार-बार जांचने की आदत है। हालांकि, एनपीसीआई का मानना है कि यह सीमा सर्वर पर अनावश्यक दबाव कम करने में मदद करेगी और सिस्टम को अधिक कुशलतापूर्वक संचालित करेगी।
खाता विवरण देखने की सीमा
यूपीआई में लिंक किए गए बैंक खातों की जानकारी प्राप्त करने के लिए एक विशेष एपीआई का उपयोग किया जाता है जिसे लिस्ट अकाउंट एपीआई कहा जाता है। नई व्यवस्था के तहत हर उपयोगकर्ता और हर एप्लिकेशन से केवल पच्चीस बार ही इस एपीआई के माध्यम से खाते की सूची देखी जा सकती है। पहले इस पर कोई विशेष सीमा नहीं थी जिससे बार-बार अकाउंट डिटेल्स की रिक्वेस्ट भेजी जा सकती थीं। ये अनावश्यक रिक्वेस्ट्स बैंकिंग सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव डालती थीं और इसलिए अब इस पर कड़ी सीमा लगा दी गई है। यह नीति सर्वर की क्षमता को बेहतर तरीके से उपयोग करने में सहायक साबित होगी।
ऑटोपे लेनदेन के नियमों में बदलाव
यूपीआई के माध्यम से किए जाने वाले स्वचालित भुगतान जैसे कि सदस्यता, ईएमआई, बिल भुगतान और अन्य आवर्ती लेनदेन अब केवल गैर-व्यस्त घंटों में संसाधित किए जाएंगे। व्यस्त घंटों के दौरान इन लेनदेन को संसाधित नहीं किया जाएगा ताकि तत्काल लेनदेन को प्राथमिकता दी जा सके। इसके अलावा, हर ऑटोपे रिक्वेस्ट के लिए केवल चार बार ही संसाधन का प्रयास किया जाएगा जिसमें एक मूल प्रयास और तीन पुनः प्रयास शामिल होंगे। यह नीति लेनदेन की विफलता को कम करने और सिस्टम की दक्षता बढ़ाने के लिए डिज़ाइन की गई है।
निष्क्रिय यूपीआई आईडी को अक्षम करना
एक नई और महत्वपूर्ण नीति के तहत यदि किसी की यूपीआई आईडी को पिछले बारह महीनों में कभी उपयोग में नहीं लाया गया है तो वह स्वचालित रूप से अक्षम कर दी जाएगी। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि मोबाइल नंबर अक्सर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पुनः आवंटित कर दिए जाते हैं और पुरानी यूपीआई आईडी की सुरक्षा के लिए यह आवश्यक है। अगर किसी का मोबाइल नंबर किसी अन्य को दे दिया जाता है तो उस नई संख्या को पुरानी यूपीआई आईडी तक पहुंच नहीं मिलनी चाहिए। इसलिए निष्क्रिय खातों को स्वचालित रूप से अक्षम करना सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण उपाय है।
बैंक खाता जोड़ने में सख्त सत्यापन
यूपीआई में नया बैंक खाता जोड़ते समय सुरक्षा उपायों को और अधिक कड़ा बना दिया गया है। अब अधिक व्यापक सत्यापन प्रक्रिया और उपयोगकर्ता प्रमाणीकरण के चरणों का पालन करना होगा। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है कि गलत लोग किसी और के बैंक खाते को यूपीआई से लिंक न कर सकें। मजबूत प्रमाणीकरण प्रक्रिया धोखाधड़ी और अनाधिकृत पहुंच को रोकने में मदद करेगी। यह विशेषकर महत्वपूर्ण है क्योंकि साइबर अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं।
एपीआई प्रतिक्रिया समय में सुधार
यूपीआई सिस्टम में किसी भी महत्वपूर्ण लेनदेन एपीआई की प्रतिक्रिया अब दस सेकंड के अंदर मिलनी चाहिए जबकि पहले यह तीस सेकंड तक हो सकती थी। यह तीन गुना तेजी आएगी जिससे वास्तविक समय के लेनदेन अधिक तेजी और सुचारुता से संसाधित होंगे। तेजी से लेनदेन का मतलब है कि उपयोगकर्ताओं को देरी की समस्या कम आएगी और वह अपने भुगतान कार्य तेजी से पूरा कर सकेंगे।
क्रेडिट लाइन के माध्यम से भुगतान
चौबीस जनवरी 2026 के बाद उपयोगकर्ता यूपीआई के माध्यम से बैंक या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी से मिली पूर्व-अनुमोदित क्रेडिट लाइन से भुगतान या धन निकाल सकते हैं। यह सुविधा उन लोगों के लिए उपयोगी है जिन्हें आकस्मिक आर्थिक जरूरतों के समय ओवरड्राफ्ट की आवश्यकता पड़ती है।
यूपीआई के ये नए नियम डिजिटल भुगतान प्रणाली को मजबूत और विश्वसनीय बनाने के लिए लाए गए हैं। हर उपयोगकर्ता को इन नियमों का पालन करना चाहिए।
Disclaimer
यह लेख केवल सामान्य सूचनात्मक और शैक्षणिक जागरूकता के उद्देश्य से 29 जनवरी 2026 को तैयार किया गया है। यूपीआई के नए नियमों से संबंधित सभी जानकारी नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा जारी आधिकारिक घोषणाओं और सार्वजनिक सूचनाओं पर आधारित है। यूपीआई नियमों, तकनीकी विशिष्टताओं, लागू की जाने वाली सीमाओं और अन्य विवरण समय-समय पर परिवर्तित हो सकते हैं। विभिन्न बैंकों और पेमेंट एप्लिकेशन के द्वारा नियमों का कार्यान्वयन भिन्न-भिन्न हो सकता है। किसी भी महत्वपूर्ण वित्तीय लेनदेन या निर्णय लेने से पहले कृपया केवल आधिकारिक आरबीआई, एनपीसीआई या अपने बैंक द्वारा जारी की गई सूचनाओं को प्रामाणिक माना जाए। लेखक और प्रकाशक इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की पूर्ण सटीकता के लिए या इसके आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के परिणामों के लिए कोई जिम्मेदारी नहीं लेते हैं। केवल आधिकारिक सरकारी स्रोतों और विश्वसनीय वित्तीय संस्थानों पर ही निर्भर रहें।




